हाटपीपल्या के चुनावी हाट में भितरघात के “सौदे” बनेंगे हार-जीत का कारण

हाटपीपल्या के चुनावी हाट में भितरघात के “सौदे” बनेंगे हार-जीत का कारण

कमलेश गुरु/ @ the special news

  • निर्णायक हालात बना सकते हैं मुस्लिम वोट
  • हर प्रत्याशी को करना होगी खाती समाज की खातिरदारी
  • कांग्रेस यदि भाजपा में सेंधमारी करे तो पलट सकते हैं हालात

इंदौर ब्यूरो। ज्योतिरादित्य के समर्थन में कमलनाथ सरकार से समर्थन खींचने वालों में देवास जिले की हाटपीपल्या विधानसभा के कांग्रेस विधायक मनोज चौधरी भी थे। चौधरी के त्यागपत्र के बाद हाटपीपल्या सीट रिक्त हो गई और उन्होंने सिंधिया का साथ बनाए रखने के लिए भाजपा की सदस्यता ले ली है।
सिंधिया के भगवा चोला ओढ़ते ही भाजपा अपना कुनबा बढऩे की बात करने लगी। इस बीच, हाटपीपल्या से दो बार के विधायक रहे और वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में मनोज चौधरी से पराजित हुए पूर्व राज्यमंत्री दीपक जोशी का भविष्य भी दांव पर लग चुका है। हालांकि कमलनाथ सरकार गिरने के बाद वे चौधरी को समर्थन करने की बात भी कह चुके हैं, लेकिन वर्तमान हालात में दोनों ही दलों के कार्यकर्ता जवाब दे पाने की स्थिति में नहीं हैं। कांग्रेस से यदि कोई कद्दावर नेता टिकट पाने में कामयाब रहता है या फिर भाजपा में कांग्रेस सेंधमारी कर लेती है तो उसके लिए भी
सीट जीतना मुश्किल नहीं होगा।


ब्राह्मण-राजपूत-सैंधवों का रहा है कब्जा
मप्र विधानसभा की हाटपीपल्या सीट 1977 में बनाए गई थी। 2018 का चुनाव छोड़ दें तो इसके पहले के 9 विधानसभा चुनावों में इस सीट पर राजपूत, सैंधव व ब्राह्मणों का कब्जा रहा है। पहले दो चुनावों में तेजसिंह सैंधव विधायक बने। 1985 के चुनाव में राजपूत समाज के राजेन्द्रसिंह बघेल ने उन्हें पराजित कर दिया। उसके बाद बघेल और सैंधव की प्रतिद्वंद्विता 1998 के विधानसभा चुनाव तक चली। वर्ष 1990 व 1998 में सैंधव जीते तो वर्ष 1993 व 2003 में बघेल जीते। वर्ष 2003 में भाजपा ने सरस्वती शिशु मंदिर के मास्टर रायसिंह सैंधव को टिकट दिया था। लेकिन वे बघेल से हार गए। बागली विधानसभा सीट एसटी आरक्षित होने के बाद पूर्व मंत्री दीपक जोशी ने हाटपीपल्या का रुख किया और वर्ष 2008 व 2013 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के बघेल को हराया। वर्ष 2018 के चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने समर्थक मनोज चौधरी को टिकट
दिलवाया और उनके पक्ष में सभा भी संबोधित की। नारायणसिंह चौधरी का चुनाव मैनेजमेंट संभाल चुके मनोज के सामने जोशी बड़ा नाम था लेकिन, नए नवेले नेता होने के बाद भी वे मतदाताओं को अपने पक्ष में रिझाने में कामयाब रहे।

खाती और मुस्लिम वोटें निर्णायक
क्षेत्र में मुस्लिम समाज के करीब 22 हजार से ज्यादा वोट हैं जो कि पारंपरिक तरीके से कांग्रेस के रहे हैं। खाती समाज के भी तकरीबन 22 हजार वोट हैं जो कि दल बदल के दल-दल में फंसने से यदि बंटे तो निश्चित ही परिणाम चौंकाने वाले आएंगे। राजपूत भी जीत की बाजी पलटने का माद्दा रखते हैं।

खेल बिगाड़ सकते हैं दीपक
अब जबकि मनोज चौधरी भाजपा में शामिल हो गए हैं और दीपक जोशी को दरकिनार करके भाजपा मनोज को टिकिट देने की तैयारी में जुटी है । ऐसे में माना जा रहा है किसी भी हालत में दीपक जोशी कम से कम पूरे मन से तो चौधरी का साथ नहीं देंगे। दीपक ने यदि मनोज का हाथ कसकर नहीं पकड़ा तो क्षेत्र के ब्राह्मण वोट बिखरना तय है। यदि ऐसा होता है तो मनोज के लिए सीट जीतना आसान नहीं होगा। दीपक जोशी अपने राजनीतिक भविष्य की खातिर कम
से कम किसी और नेता को तो अपनी पार्टी में पनपने नहीं देंगे। दीपक जोशी पूर्व सीएम कैलाश जोशी के बेटे हैं। दीपक जोशी देवास जिले की हाटपीपल्या विधानसभा सीट से विधायक रह चुके हैं। 2018 के विधानसभा में मनोज चौधरी से चुनाव हार गए थे। अब मनोज चौधरी भाजपा में शामिल हो गए हैं ऐसे में दीपक जोशी अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर संशय में हैं।


कब किसको मिली जीत

1977 तेजसिंह करणसिंह जेएनपी
1980 तेज सिंह करण सिंह सेंधव भाजपा
1985 राजेंद्रसिंह बघेल कांग्रेस
1990 कुंवर तेज सिंह भाजपा
उपचुनाव करण सिंह सेंधव भाजपा
1993 ठाकुर राजेंद्र सिंह बघेल कांग्रेस
1998 तेजसिंह सेंधव भाजपा
2003 बघेल राजेंद्र सिंह कांग्रेस
2008 दीपक कैलाश जोशी भाजपा
2013 दीपक कैलाश जोशी भाजपा
2018 मनोज चौधरी कांग्रेस


जाति का ये है समीकरण
खाती – 22,000
मुस्लिम – 22,000
राजपूत – 17,000
पाटीदार – 10,000
सैंधव – 8,000
ब्राह्मण – 5,000
अन्य समाज -70,000
कुल मतदाता – 1,86,421


हाटपीपलिया के वोटर
महिलाएं 97,838
पुरुष 91, 834
अन्य 41
कुल मतदाता 189676

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